Posted on June 22, 2008 by atanudey
कुछ समय पहले मैंने भारत द्वारा पाकिस्तानी जिहादी गुटों को दान पर क्षोभ व्यक्ति किया था और फिर उसी लेख की टिप्पणियों का एक प्रत्युत्तर दिया था। पहले लेख की टिप्पणी के तौर पर तनवीर ने लिखा था:
अतनु: आप ठहरे अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट, आपको तो दुनियादारी के बारे में अच्छी तरह मालूम ही होगा। हर चीज़ के लिए [...]
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Posted on June 21, 2008 by atanudey
“भारत पाकिस्तान के जिहादी गुटों को पैसा दे रहा है” पर डैन ने कहा:
आप यह भी तो कह सकते थे कि पाकिस्तान की ज़रूरत के समय भारत की दया और दान की वजह से कम से कम कुछ पाकिस्तानियों पर अच्छा असर पड़ेगा। शायद इस मदद से दो लोगों के दिल और मन बदलें, और हो [...]
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Posted on June 20, 2008 by atanudey
पैसे का कोई चरित्र नहीं होता है।
अगर मैंने अपने पड़ोसी को राशन खऱीदने के लिए पैसा दिया, तो मैंने सच्चरित्र होने का सुबूत देते हुए पड़ोसी धर्म निभाया, लेकिन अगर पड़ोसी शराबी, नशेड़ी हो तो? हो सकता है कि उसे पैसे दे के मैं उसे फ़ोकट की दारू दे रहा हूँ। मान लो कि मैं पैसे देने के बजाय खुद [...]
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Posted on June 19, 2008 by atanudey
मुकेश अम्बानी मुझे बेहद पसन्द हैं। वह बढ़िया हैं। आशा करता हूँ कि वे खूब पैसे कमाएँ। यह रहा न्यू यॉर्क टाइम्स में छपा उन पर एक लेख: मुकेश अम्बानी – भारत के सबसे अमीर इंसान – से मिलिए।
. . . (आभार: Tarang_72)
Original article in English
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Posted on June 18, 2008 by atanudey
प्रिय श्री टाटा जी,
आशा है कि आप तटीय उड़ीसा में प्रस्तावित व्यावसायिक बन्दरगाह स्थापित करने का निर्णय ऑलिव रिड्ली समुद्री कछुए को मद्देनज़र रखते हुए, और उसका गम्भीर अध्ययन करने के बाद ही करेंगे। धन्यवाद।
सविनय,
अतनु
[सन्दर्भ।]
Original article in English
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Posted on June 17, 2008 by atanudey
(आर ऍस मलपति से) रॉय्टर्स का ब्यौरा, जापान में जेनेपैक्स द्वारा पाने से चलने वाली कार
इस कार में एक ऊर्जा जनक है जो कि कार की टंकी में डाले पाने के अन्दर से हाइड्रोजन खींच लेता है। फिर यह जनरेटर इलेक्ट्रॉन छोड़ता है, जिनकी मदद से कार चल पड़ती है। इस तकनीक का आविष्कार करने [...]
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Posted on June 16, 2008 by atanudey
कनाडा के प्रकाशन ‘द प्रॉविंस’ (मङ्गलवार, १ मई १९९०) से, लेखक: क्रॉफ़र्ड किलियन।
ऍडॉल्फ़ हिटलर के बहुत से जोड़ीदार हैं
मेरे वकील साहब, निक मेफ़िस्टो, कल मुझे जश्न मनाने दावत पर ले गए, चिन्ता हुई।
निक साहब अजीबोगरीब चीज़ों की वकालत करते हैं। वह जिन चीज़ों की वकालत करते हैं, जिन चीज़ों का वह जश्न मनाते हैं, आम [...]
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Posted on June 13, 2008 by atanudey
मुझे शुक्रिया न अदा करें। अर्थशास्त्री होने के तौर पर मेरा तो फ़र्ज़ है कि लक्ष्य तक पहुँचने के और प्रभावी रास्ते सुझाऊँ। यह है वह समस्या, जिसका मैं समाधान खोज रहा था। सिफ़ी.कॉम कह रहा है कि “आईऍसआई आतङ्कवादियों के दुगुना धन देना चाहती है।”
पाकिस्तान की इण्टर सर्विसेज़ इण्टेलिजेंस (आई ऍस आई) ने हाल [...]
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Posted on June 13, 2008 by atanudey
यूनवर्सल स्यूडियोज़ को एक किङ्ग कॉङ्ग मञ्च बनाना चाहिए जिसमें एक नया चमचमाता प्रसाधन कक्ष हो, जो कि किसी ऐसे फ़िल्मी सेट में हो जो कि व्हाइट हाउस के ओवल ऑफ़िस की शक्ल का हो, जहाँ कि वह किसी विशाल चन्द्र-खड्ड टेलिस्कोप के शीशे की तरह उभार वाला हो, और उपराष्ट्रपति के दाएँ हाथ में [...]
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Posted on June 13, 2008 by atanudey
कल के ब्यौरों से एक समाचार:
“आयोजित फुटकर कार्यक्रम के तहत रिलायंस रिटेल कई ग्रामीण कारोबार केन्द्र खोलेगा। एक स्तर पर तो यह कृषि उत्पाद को एकत्रित करने के केन्द्र के तौर पर काम करेंगे। दूसरे स्तर पर, यह कृषि – सहायक उत्तम सामग्री और ग्रामीण उपभोक्ता के लिए उत्पाद व सेवाएँ भी प्रदान करेंगे,” अम्बानी [...]
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