मध्यस्थहीनता

मुझे शुक्रिया न अदा करें। अर्थशास्त्री होने के तौर पर मेरा तो फ़र्ज़ है कि लक्ष्य तक पहुँचने के और प्रभावी रास्ते सुझाऊँ। यह है वह समस्या, जिसका मैं समाधान खोज रहा था। सिफ़ी.कॉम कह रहा है कि “आईऍसआई आतङ्कवादियों के दुगुना धन देना चाहती है।”
पाकिस्तान की इण्टर सर्विसेज़ इण्टेलिजेंस (आई ऍस आई) ने हाल [...]

क्यों?

यूनवर्सल स्यूडियोज़ को एक किङ्ग कॉङ्ग मञ्च बनाना चाहिए जिसमें एक नया चमचमाता प्रसाधन कक्ष हो, जो कि किसी ऐसे फ़िल्मी सेट में हो जो कि व्हाइट हाउस के ओवल ऑफ़िस की शक्ल का हो, जहाँ कि वह किसी विशाल चन्द्र-खड्ड टेलिस्कोप के शीशे की तरह उभार वाला हो, और उपराष्ट्रपति के दाएँ हाथ में [...]

रिलायंस के ग्रामीण कारोबार केन्द्र

कल के ब्यौरों से एक समाचार:
“आयोजित फुटकर कार्यक्रम के तहत रिलायंस रिटेल कई ग्रामीण कारोबार केन्द्र खोलेगा। एक स्तर पर तो यह कृषि उत्पाद को एकत्रित करने के केन्द्र के तौर पर काम करेंगे। दूसरे स्तर पर, यह कृषि – सहायक उत्तम सामग्री और ग्रामीण उपभोक्ता के लिए उत्पाद व सेवाएँ भी प्रदान करेंगे,” अम्बानी [...]

प्रथम संशोधन

मेरा अमेरिका महान
जब भी मुझे ट्रकों के पीछे लिखा “मेरा भारत महान” का नारा नज़र आता है, एक झटका लगता है। झटका है, हैरत, नाज़, चिड़चिड़ाहट और उम्मीद से मिश्रित झटका। अपने देश पर नाज़ होने की वजह से यह उम्मीद जगती है कि कि शायद यह सच हो, पर मेरी अन्दरूनी चिड़चिड़ाहट यह मानने [...]