(आर ऍस मलपति से) रॉय्टर्स का ब्यौरा, जापान में जेनेपैक्स द्वारा पाने से चलने वाली कार
इस कार में एक ऊर्जा जनक है जो कि कार की टंकी में डाले पाने के अन्दर से हाइड्रोजन खींच लेता है। फिर यह जनरेटर इलेक्ट्रॉन छोड़ता है, जिनकी मदद से कार चल पड़ती है। इस तकनीक का आविष्कार करने वाली कम्पनी, जेनेपैक्स जापान के कारनिर्माताओं के साथ मिल कर इस प्रकार की कार बनाने जा रही है।
शुक्र है भगवान का कि अविश्वसनीय तकनीक पैदा करने वाला भारत अकेला नहीं है (याद करें, कुछ साल पहले एक बाल्टी पानी में कुछ डंडियाँ डाल के डीज़ल पैदा करने वाला सनसनी खेज “आविष्कार”), गूगल में “water fuel” की खोज कीजिए, आपको सिरफिरों और उचक्कों द्वारा प्रकाशित बहुत सारी अविश्वसनीय तकनीकें मिलेंगी। उदाहरण के लिए देखिए यह वाली।
सोचने के मजबूर हो जाता हूँ कि लोगों को कब समझ आएगा, स्वचालित यन्त्र बनाना सम्भव नहीं है। पानी में मौजूद हाइड्रोजन के अणु को तोड़ने के लिए ऊर्जा तो चाहिए। और यह ऊर्जा कहीं से तो आएगी। रॉय्टर्स का ब्यौरा बस इतना कहता है कि इस कार में एक “ऊर्जा जनक” है जो कि हाइड्रोजन खींचने के लिए ऊर्जा का इस्तेमाल करता है। वाह! तो फिर इस “ऊर्जा जनक” की ऊर्जा का ही इस्तेमाल क्यों न कर लें – बीच में पानी फेरने की भी क्या ज़रूरत है?
ठीक है, हो सकता है कि पानी यहाँ पर “काम का द्रव्य” हो, जैसे आम आन्तरिक दहन इंजन में काम का द्रव्य होती है वायु। थोड़ा ईंधन लो, उसे जलाओ(वायु में), उससे सिलिण्डर में मौजूद वायु को गर्म करने की ऊर्जा पैदा होती है, इससे वायु फैलती है, और इस फैलाव से आप कुछ काम कर लेते हैं, फिर इस फैली हुई वायु को बाहर फेंक देते हैं (एग्ज़ास्ट इस काम के द्रव्य के बाहर निकलने को ही कहते हैं), और फिर से वही कहानी बार बार दोहराते जाते हैं। पर फिर भी ऊर्जा का स्रोत तो चाहिए ही न – आमतौर पर यह तेल जैसा कोई हाइ़ड्रोकार्बन होता है।
यदि ऐसा है तो अगर पानी यहाँ ईंधन है, तो आंतरिक दहन इंजन में वायु ईंधन है। अगर कोई रहस्यमय तकनीक है जो एकदम शून्य में से ऊर्जा पैदा कर देती है तो बताओ भई इसके बारे में। या, न ही बताओ तो अच्छा है। हमने कोल्ड फ़्यूज़न के बारे में भी सुना था, लेकिन यह भी वह चीज़ नहीं थी जो इसके आविष्कारकों ने कहा था।
सोचने को मजबूर हो जाता हूँ कि रॉय्टर्स कब ऐसे लोगों को अपने यहाँ रखना शुरू करेगा जिन्हें विज्ञान के मूलभूत सिद्धान्तों का ज़्यादा नहीं तो थोड़ा बहुत ही ज्ञान हो।
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