भारत पाकिस्तानी जिहाद के लिए पैसे दे रहा है – प्रत्युत्तर

भारत पाकिस्तान के जिहादी गुटों को पैसा दे रहा है” पर डैन ने कहा:

आप यह भी तो कह सकते थे कि पाकिस्तान की ज़रूरत के समय भारत की दया और दान की वजह से कम से कम कुछ पाकिस्तानियों पर अच्छा असर पड़ेगा। शायद इस मदद से दो लोगों के दिल और मन बदलेंऔर हो सकता है कि इससे आपके पड़ोसियों के अन्दर बगल के घरों पर बम गिराने कि इच्छा कम हो।

डैन जीमज़ाक कर रहे हों तो बात और हैवरना आपकी मासूमियत पर मुस्कुराहट ही आती है। अगर २,५०,००,००० डॉलर से दो दिल बदल जाएँगे तो कुछ मिलियन दिल बदलने के लिए ब्राज़िलियन** डॉलरों की ज़रूरत होगी(और इतने पैसे की उधारी – आन्तरिक व विदेशी मिला के – तो अमरीका की भी नहीं है – कुछ हज़ार खरब डॉलर ही है।)
डैन साहबपाकिस्तानी सैन्य नीति, पाकिस्तानी सेना निर्धारित करती है। वह तो छड़िएवहाँ सब कुछ सेना ही निर्धारित करती है। कुछ साल छोड़ दें तो पाकिस्तान हमेशा से ही सैनिक तानाशाही में रहा है। इसलिएआम आदमी कुछ भी सोचे-मानेइसका रत्ती भर असर पाकिस्तान की नीतियों पर नहीं पड़ने वाला। पड़ता भी होतो भी यह आम आदमी “शैतान काफ़िर बुतपरस्ती” हिन्दुओं के देश को इस दुनिया से मिटा देने के लिए घास तक छीलने और खाने को तैयार होगा। पाकिस्तान के नेता सार्वजनिक रूप से कई बार भारत के खिलाफ़ १०००-साला जिहाद का वादा कर चुके हैं। यह भी मान के चल लें कि ये सारे जिहाद एक साथ ही शुरू हुएतो भी काफ़िर भारत के खिलाफ़ ९५० साल की जिहाद बाकी हैअगर ये जिहाद एक के बाद एक होंगे तो कुफ़्र भारत को ३००० साल और लड़ना होगा।

आप कह सकते हैं कि बुतपरस्त शैतान हिन्दू होने के नाते मैं बहुत अधिक बढ़ा चढ़ा के बातें कर रहा हूँ। शायद यह सही है। पर हम तो यहाँ बस अतिशयोक्ति अलङ्कार पर बहस-बात कर रहे हैंऔर उधर पाकिस्तान तो $५,००,००,००,००० (यानी पाँच खरब डॉलर) के ऍफ़-१६ खरीद रहा हैबातें नहीं कर रहा है। इसके अलावा और भी बहुत सा असला ले रहा हैपाँच पे दस की शर्त लगी कि इस असले का इस्तेमाल अफ़ग़ानिस्तानचीनसऊदी अरबईरानया पूर्व सोवियत यूनियन के गणराज्यों के खिलाफ़ नहीं होने वाला है। इनका निशाना भारत है अजीज़ डैन साहब।

मेरे पुरखे बहुदेवपूजी होने के नातेबर्बर इस्लामी आक्रमणकारियों की क्रूरता का ग्रास बनेइनके नेता थे बाबरग़ौर मुहम्मदमहमूद ग़ज़नीअहमद शाह अब्दाली। ये शख्स तो निकल लिए पर अपनी विरासत छोड़ गए हैं। पाकिस्तान की खूनी मिसाइलें जो नाभिकीय अस्त्र गिराने के काबिल हैंइन्ही महाशयों के नाम पर रखी गई हैं जो भारत को नष्ट करने कभी आए थे। इन मिसाइलों का मुँह सउदी अरब या चीन या अफ़ग़ानिस्तान की ओर नहीं है। इनका मुँह मुम्बईनई दिल्लीबङ्गलोर और नागपुर(मेरा घर) की ओर है ताकि ये वह सब निपटा सकें जो इनके हमनाम सैकड़ों सालों पहले पूरा नहीं कर पाए थे।

वापस उसी बात पर आते हैं, यानी भारत द्वारा पाकिस्तानी जिहादियों को पैसे दिए जाने वाली बात पर। मैंने पिछले लेख में सबसे पहले जो कहा था उसी को फिर से यहाँ दोहराता हूँ: पैसे का कोई चरित्र नहीं होता है।

आप पाकिस्तान को किस चीज़ के लिए पैसे भेज रहे हैं, इससे क्या फ़र्क पड़ता है? जब तक पाकिस्तान ढाई करोड़ डॉलर से अधिक पैसा आतङ्कवाद को पनपने में लगा रहा है, तब तक यह माना जा सकता है कि भारत द्वारा दिया गया दान पूरी तरह से आतङ्कवाद के प्रोत्साहन में ही काम आएगा। यह लीजिए गणित। अगर पाकिस्तान, भारत को नष्ट करने के लिए अपने ऊपर और आतङ्कियों के ऊपर केवल १ करोड़ डॉलर खर्च कर रहा होता, तो इसका यह मतलब होता कि ढाई करोड़ डॉलर उन्हें भेज कर हम १ करोड़ रुपए अपने आपको नष्ट करने के लिए ही दान में दे रहे हैं, और बाकी डेढ़ करोड़, शायद, भूखों को रोटी खिलाने के लिए बचेगा। पर अगर पाकिस्तान भारत को नष्ट करने के लिए $५ खरब के हथियार खरीद रहा है, तो भारत द्वारा अमरीका को २.५ करोड़ भेजने का मतलब है भारत को नष्ट करने के खर्चे की आधा फ़ीसदी रकम का योगदान, भूखों को रोटी देने के लिए कुछ भी नहीं। दूसरे शब्दों में, आँख के अन्धे, गाँठ के पूरे।

अगर पैसे का अपना कोई चरित्र न होने का मेरा तर्क अभी भी पूरी तरह स्पष्ट न हुआ हो, तो मैं एक और उदाहरण से समझाता हूँ। अगर पाकिस्तान अमेरिका से बस एक ऍफ़-१६ कम खरीदता है, तो उसके पास भूकम्प पीड़ितों की मदद के लिए दस करोड़ डॉलर बिना कुछ किए धरे आ जाते हैं।  अगर उनके पास हथियार खरीदने के पैसे हैं तो उन्हें अपने जानी दुश्मन से दान लेने की कुछ खास ज़रूरत है ही नहीं।

भारत सरकार को मेरी ओर से कुछ बिन माँगी फ़ोकट की सलाह: पहले दिया घर में जलाओ। अगर आप नई दिल्ली और भारत के बाकी हिस्सों की झुग्गियों में झाँकेंगे तो आपको लाखों कश्मीरी मिलेंगे जिन्हें अपने पुरखों के इलाकों से खदेड़ा गया है, पूरी नस्ल को साफ़ किया गया है। पहले उन्हें दो ढाई करोड़ डॉलर, बेवकूफ़ों।

** [ब्राज़िलियन एक बहुत बड़ी अज्ञात सङ्ख्या को कहते हैं। यह शब्द बना ऐसे। राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश को बताया गया कि एक मुठभेड़ में तीन ब्राज़ीलियन सैनिक मारे गए। उन्होंने शालीनता अपना सर नीचे झुका लिया। उनके सलाहकार इस भावुकता से चकराए, आखिर सैनिक ब्राज़ील के थे, हमारे नहीं।  फिर उन्होंने अपना सर उठाया और पूछा, “एक ब्राज़िलियन बराबर कितने मिलियन?”]

[इस धारावाहिक की आखिरी किश्त: भारत पाकिस्तानी जिहादियों को पैसा दे रहा है का भाग ३।]
Original article in English

6 Responses

  1. Great job, Alok! And a big factor is the uniformity of the Hindi font on the web — Bengali still suffers from a lot of hitches! :(

  2. Alok, Fabulous work!

    Does WordPress allow Hindi font or you need to download something to write in Hindi? I would love to know the process of doing this. Thanks

  3. Sudipta, as far as uniformity goes, Bangla has the same coolness as Hindi/Devanagari on the web – if not more. You can get the unicode-code-pointed Bangla fonts from here.

    Ranjan, the process of doing this is trivial, it’s documented at http://devanaagarii.net. Feel free to ask more questions.

    Technology is not a constraint at this point for creating Indian language content.

  4. छा गए गुरु ! बिल्कुल मन माफिक धुलाई ! आभार आपके आलेख के लिए ! बम्पाटिंग जारी रहे !

  5. सोचता हूँ पाक जा कर मुस्लिम बन जाँउ
    क्‍योकि बुद्वू दोस्‍त से समझदार दुश्‍मन बढिया

    अपनी ही पिटाई के लिये हम पैसे दे रहे है हमारे –यापे की भी कोई सीमा नहीं

  6. भैया, बहुत मेहनत पड़ती होगी इतना अच्छा अनुवाद करने में।

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